बीपीओ क्या है BPO की Full Form क्या होती है जाने

नमस्कार दोस्तो, रोजगार के अवसर आज बहुत ज्यादा सीमित होकर रह गए है जिस कारण आपके पास अगर कुछ स्किल्स नहीं है तो आपको नौकरी मिलना काफी मुश्किल है। परंतु आज के समय में बीपीओ एक सैक्टर ऐसा भी जिसके अंदर भरपूर नौकरी के ऑप्शन पैदा हो रहे है तथा अनेक युवा नौकरी भी करते है। बीपीओ, यह शब्द आपने कई लोगो की जुबान से जरूर सुना होगा परंतु बीपीओ क्या ( What is BPO ) होता है बीपीओ की फुल फॉर्म ( BPO Full Form ) क्या होती है इसके बारे में ज़्यादातर लोगो को जानकारी ही नहीं होती है।

आज के समय में कॉल सेंटर यां फिर बीपीओ के द्वारा अनेक बड़ी बड़ी कंपनी के कस्टमर केयर जैसे कामों को सँभाल लिया है। जिसके चलते बीपीओ के अंदर अनेक युवाओं को जॉब मिल जाती है तथा बड़ी कंपनी को अपना कस्टमर केयर का काम खुद नहीं करना पड़ता है।

कॉल सेंटर आज हर बड़े बड़े शहरों में बने हुए है जहां पर हजारों लोग काम करके अपनी जीविका चलाते है आज हम आपको इन कॉल सेंटर यां बीपीओ के बारे में विस्तार से बताने वाले है इसकी शुरूआत किस प्रकार हुई थी तथा इनके अंदर क्या काम होते है।

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बीपीओ क्या है BPO Kya Hota Hai

आज के समय में बड़ी बड़ी कंपनी अपने कई काम कम कीमत पर करवाना चाहती है, इसके लिए वे अपना काम किसी भी डील पर दूसरे देश की किसी वोमपनय को दे देती है इसे ही बीपीओ कहते है।

मान लीजिये कोई कंपनी अम्रीका के अंदर है तथा उसे वहाँ पर अपनी कस्टमर केयर की सुविधा देने के लिए लोगो को रखना पड़ेगा तो वहाँ पर लोगो को वेतन ज्यादा देना होगा।

इसलिए ये सब कंपनी बीपीओ की सुविधा लेती है उनके द्वारा भारत जैसे देशों के अंदर किसी कंपनी के साथ डील करके उन्हे कस्टमर केयर जैसे काम दे दिये जाते है क्योंकि भारत में उन्हे इस काम के लिए लोगो को कम वेतन देना पड़ेगा तथा यहाँ पर काम करवाना सस्ता भी पड़ता है, इसे बीपीओ कहा जाता है।

इसे हम आप भाषा के अंदर इस प्रकार समझ सकते है की किसी बड़ी कंपनी के द्वारा अपने कुछ छोटे छोटे कामो के लिए किसी कंपनी के साथ कोंट्रेक्ट करके उसे अपने काम दे देना।

जिससे कंपनी के ऊपर से उस काम का बोझ कम हो जाता है यह काम ठेके के तोर पर दिये जाते है। इससे कंपनी को उस काम के लिए एक्सपेर्ट लोग भी मिल जाते है तथा कंपनी को अलग से यह काम खुद करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

बीपीओ की फुल फॉर्म क्या होती है? BPO Full Form

आपने कस्टमर केयर का नाम जरूर सुना होगा यां फिर आपने अपनी सिम के अंदर आने वाली किसी दिक्कत के समाधान के लिए बात भी की होगी। उसी प्रकार से बीपीओ के अंदर काम होता है, इसमें काफी सारी कस्टमर केयर से जुड़ी सुविधा दी जाती है।

BPO इंग्लिश के कुछ शब्दों से मिलकर बना है जिनहे अलग अलग तोड़ने पर उनका अलग अलग मतलब भी निकलता है। BPO Full Form Business Process Outsource होता है तथा बीपीओ की हिन्दी के अंदर फुल फॉर्म बिज़नस प्रोसैस आउटसोर्सिंग बनाता है।

बीपीओ को एक अन्य नाम ITES से भी जाना जाता है जिसका English Meaning Information technology enabled services बनता है।

यहाँ पर B का Meaning Business, P का Mean Process तथा O का Means Outsourcing होता है। इन तीनों शब्दों को बनाकर ही बीपीआईओ बनता है।

बीपीओ का इतिहास क्या है। BPO Ki History

अब हम बीपीओ के इतिहास के बारे में जान लेते है की यह बात सबसे पहले किसने सोची की कुछ ऐसा किया जाए जिससे बड़ी बड़ी कंपनी के कुछ छोटे छोटे कामो को आउटसोर्स किया जा सके।

इसकी शुरुआत सबसे पहले सन 1962 के अंदर Ross Perot ने की थी, इनहोने सबसे पहले इसके लिए कंपनी ने यह कहा की आप डिज़ाइनिंग, प्रॉडक्ट के बारे में ज्यादा जानते है परंतु हम आपको आपके प्रॉडक्ट से जुड़ी सभी प्रकार की इन्फॉर्मेशन देंगे इसके बदले में आपको कुछ फीस देनी होगी।

इस प्रकार बीपीओ की शुरुआत हुई थी सबसे पहले यह Electronic Data Systems के रूप में शुरू हुई थी।

BPO ke bare men jane
BPO के बारे में जाने

बीपीओ में कौनसी नौकरी होती है। BPO Jobs Types

बीपीओ के अंदर मुख्य रूप से 2 नौकरी आती है जिनके अंदर अलग अलग काम होते है हम आपको इन दोनों जॉब के बारे में विस्तार से बताने वाले है।

  1. Front-office customer services
  2. Back-office business functions

Front Office Customer Services –

इसके अंदर वे सभी काम शामिल होते है जिसमें कॉल सेंटर वाले काम आते है। इसके अंदर जो काम देश से बाहर होए है उन्हे उन्हे आउटसोर्स कहा जाता है।

अगर कोई बड़ी कंपनी अपने काम को अपने पड़ोसी देश के अंदर काम देता है तो इसे Nearshore Outsource कहा जाता है।

आज के समय में अगर कोई America की Company वहीं पर अपने कुछ छोटे मोटे काम करती है तो उसके लिए एम्प्लोये हायर करना सबसे काठी होता

Back Office Business Functions –

इसके अंदर बिलिंग, अकाउंटिंग जैसे काम किए जाते है जो काम ऑफिस के अंदर किए जा सकते है उन काम को करने को Back-office business functions प्रकार में शामिल किया जाता है।

बीपीओ की जॉब के लिए योग्यता

आपको बीपीओ की जॉब करने के लिए कुछ योग्यता का होना जरूरी है जो अलग अलग कंपनी के कामो पर निर्भर करती है हम आपको बीपीओ के लिए जरूरी सभी योग्यताओं के बारे में विस्तार से बता देते है।

  • बीपीओ बनने के लिए सबसे जरूरी बात तो यही होती है की आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स अच्छी होनी चाहिए ताकि आप किसी भी क्लाईंट को अपनी बात आसानी से समझा सके और आपके पास तेज लिखने की क्षमता होनी जरूरी है ताकि आप क्लाईंट को बातों को साथ साथ नोट भी कर सकें।
  • आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स काफी ज्यादा बेहतर होनी चाहिए ताकि आप जिस भी क्लाईंट से बात कर रहे हो उसे अपनी बात से माना सके।
  • बीपीओ में जॉब करने के लिए आपको कंप्यूटर की कुछ जानकारी होनी चाहिए क्योंकि आपको इसमें काफी सारे काम अपने कंप्यूटर के अंदर करने पड़ते है। आप बड़ी आसानी से इस काम को कर पाएंगे अगर आपके पास थोड़ा बहुत कंप्यूटर का ज्ञान है तो
  • आपको इसके लिए मार्केट के अंदर आ रहे बदलावों से परिचित रखना होगा ताकि आप क्लाईंट की बात को समझ सके और बाजार में चल रहे ट्रेंड के बारे में ज्यादा विस्तार से बता सके। इसके लिए आपके अंदर ऐसी क्षमता होनी चाहिए की आप बाहर की बातों को ज्यादा गौर से देख सके।
  • आपका धैर्यवान होना सबसे जरूरी होता है क्योंकि इसमें आप किसी भी क्लाईंट के साथ ऊंची आवाज में बात नहीं कर सकते है आपसे क्लाईंट जो कुछ पूछता है आपको उसका जवाब देना होता है। इसलिए आप जीतने ज्यादा विनम्र और शालिन होगे उतने ही अच्छे से आप इस काम को कर पाएंगे।
  • इसके अंदर आपकी एडुकेशन क्वालिफ़िकेशन के अंदर सिर्फ ग्रेजुएशन ही मांगी जाती है आपने किसी भी फील्ड के अंदर कोई डिग्री यान फिर डिप्लोमा किया है तो आप बीपीओ की जॉब में काम कर सकते है।

बीपीओ का वेतन कितना होता है।

बीपीओ का वेतन आपके एक्सपिरियन्स के अनुसार मिलता है अगर आपने पहले से कहीं पर इस जॉब में काम किया है तो आपको थोड़ा वेतन ज्यादा मिलता है परंतु आप फ्रेशर है तो आपको पहले वेतन कम मिलेगा।

भारत के अंदर BPO Executive की हर महीने सेलरी लगभग 15 हजार रुपए से लेकर 20 हजार तक होती है परंतु आपको एक्सपिरियन्स होने के बाद आपका प्रमोशन भी हो जाता है।

बीपीओ में वेतन इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है की आपकी नौकरी किस जगह पर है अगर बड़े शहर में आपकी जॉब है तो आपको कुछ ज्यादा वेतन भी मिल सकता है।

बीपीओ के फायदे और नुकसान क्या है? जानिए

BPO के अंदर भी हर क्षेत्र की तरह फायदे और नुकसान देखने को मिलते है। इसके अंदर कुछ नुकसान भी है परंतु साथ ही बहुत से लोगो को नौकरी देने जैसे फायदे भी है इसके अलावा बीपीओ के फाड़े और नुकसान के बारे में जानते है।

बीपीओ के क्या फायदे है।

बीपीओ के काम देने वाली कंपनी तथा काम लेने वाली कंपनी दोनों को फायदा होता है इसके अलावा देश को भी फायदा होता है क्योंकि अनेक लोगो को रोजगार मिल जाता है तो चलिये इसके कुछ मुख्य फ़ायदों पर गौर करते है।

  • सबसे पहला फायदा तो कंपनी को अपने छोटे मोटे काम करवाने के लिए ज्यादा खर्च नहीं उठाना पड़ता है जिस कारण कंपनी अपने अन्य कामो पर ज्यादा ध्यान दे पाती है।
  • दूसरा काम इसके कारण बीपीओ में काम करने वाले लोगो को काम मिलता है। आज के समय में अनेक लोगो का बीपीओ में काम करके घर चलता है। जिससे बेरोजगारी को कम करने में मदद मिलती है।
  • बीपीओ में ज़्यादातर एक्सपर्ट होते है जो कंपनी के काम को उनके मुक़ाबले ज्यादा अच्छे ढंग से कर पाते है इससे उत्पादन बढ़ता है।

बीपीओ के नुकसान क्या है।

जहां एक तरफ बीपीओ के फायदे है तो दूसरी तरफ कुछ नुकसान भी जरूरी होते है हम बीपीओ के अंदर होने वाले कुछ नुकसान पर भी विस्तार से चर्चा कर लेते है।

  • सबसे पहला नुकसान यही होता है कंपनी इस काम के लिए किसी दूसरे पर पूर्ण रूप से डिपेंड हो जाती है।
  • दूसरा कंपनी का डाटा यां किस प्रॉडक्ट पर काम कर रही है यह जानकारी लीक हो सकती है डाटा की प्राइवसी खत्म होने का डर भी बना रहता है।
  • आपके क्लाईंट की काफी सारी जानकारी को बीपीओ चलाने वाली कंपनी किसी दूसरी कंपनी यां आपके कंपीटिटर को बेच भी सकती है।

बीपीओ में आउटसोर्सिंग का मतलब क्या है।

बीपीओ के अंदर आउटसोर्सिंग का मतलब किसी कंपनी के द्वारा अपने कुछ छोटे-छोटे कामो को दूसरे देश की किसी कंपनी को ठेके पर दे देना।

ये काम कंपनी आप न करने की बजाय किसी दूसरे से करवाना पसंद करती हो ऐसे काम कंपनी को कम फायदा देते हो परंतु करवाना जरूरी हो।

आउटसोर्सिंग भी दो प्रकार की होती है। इसमें Off shore Outsourcing में कोई काम के लिए किसी दूसरी विदेशी कंपनी को काम दिया जाता है वहीं Nearshore Outsourcing के अंदर कोई कंपनी काम अपने पड़ोसी देश की किसी कंपनी को दे देती है।

निष्कर्ष –

आज के इस आर्टिक्ल में हमने आपको बीपीओ के बारे में विस्तार से बता दिया है। बीपीओ को आज के समय में काफी सारे बेरोजगार लोगो को काम देने का एक सबसे बड़ा क्षेत्र है। आज हमने आपको बीपीओ क्या होता है बीपीओ की फुल फॉर्म क्या(BPO Full Form) होती है। बीपीओ के द्वारा किस प्रकार के काम किए जाते है इनके बारे में समझा दिया है।

मुझे उम्मीद है आपको बीपीओ से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारी समझ आ गयी होगी, अगर आपको इससे जुड़ी कुछ जानकारी चाहिए तो हमसे कमेंट में पूछ सकते है। अगर आपको आज का यह आर्टिक्ल पसंद आया है तो इसे लाइक कमेंट और शेयर जरूर कर दें। साथ ही आप हमें हमारे Social Media Account पर भी Follow कर लें।

QNAs About BPO

बीपीओ का आविष्कार किसने किया था।

सन 1962 के अंदर Ross Perot ने BPO की शुरुआत Electronic Data Systems के रूप में की थी।

बीपीओ का मतलब क्या होता है?

बीपीओ का मतलब किसी छोटे छोटे काम को कांट्रैक्ट के तौर पर किसी दूसरी कंपनी को देना होता है। इसके अंदर जो काम कंपनी खुद करना जरूरी नहीं समझती है उन्हे आउटसोर्स कर देती है। आसान भाषा में बीपीओ का मतलब काम को आउटसोर्स करना होता है।

बीपीओ का फुल फॉर्म क्या होता है?

बीपीओ का फुल फॉर्म बिज़नस प्रोसैस आउटसोर्सिंग होता है। BPO FULL FORM Business Process Outsource होता है।

बीपीओ कितने प्रकार के होते हैं?

बीपीओ दो प्रकार के होते है। पहला Off Shore Outsourcing BPO तथा दूसरा Nearshore Outsourcing BPO होता है।

सरल शब्दों में बीपीओ क्या है?

सरल शब्दों में बीपीओ को इस प्रकार समझ सकते है की किसी बड़ी कंपनी के द्वारा अपने कुछ छोटे छोटे कामो के लिए किसी कंपनी के साथ कोंट्रेक्ट करके उसे अपने काम को दे देना।

तुम क्यों बीपीओ में काम करना चाहते हैं?

इसके अंदर आपको एक अच्छी सैलरी मिलती है साथ ही बीपीओ के अंदर काम करके आपकी Communication Skills में काफी ज्यादा पॉज़िटिव असर देखने को मिल सकता है।

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