हमारे बारे में

नमस्कार दोस्तो, सबसे पहले हम आपका हमारे ब्लॉग के अंदर आने के लिए आपका स्वागत करते है। अब हम आपको बताते है की हमने Hubby Digital ब्लॉग की शुरुआत क्यों की है। पहला कारण तो यही है की मुझे इंटरनेट पर अपने आप को लोगो के सामने दिखाना काफी पसंद हूँ।

सबसे पहले मैं अपनी खुद की वैबसाइट अपने नाम से बनाता था परंतु मेरे बारे में लोग क्यों सर्च करेंगे। इसके बाद मुझे पता चला की हम आर्टिक्ल लिखकर इंटरनेट पर लोगो की हेल्प कर सकते है और इससे पैसा भी मिलेगा। तो जब मुझे पता चला की मेरे ब्लॉग से मैं पैसे भी कमा सकता हूँ और अपने बारे में सबको बता सकता हूँ। इसके बाद मैंने यह ब्लॉग शुरू किया था।

इस ब्लॉग को सर्च करने से पहले मैंने गूगल पर सर्च किया की लोग एक टॉपिक पर हजारों आर्टिक्ल लिख रहे है परंतु उसमे क्या कमी है। मुझे काफी कमी देखने को मिली जो मैंने अपने ब्लॉग में इम्प्रूव की है।

मैंने अपने ब्लॉग में सभी टॉपिक को स्क्रीनशॉट के साथ में समझाया है दूसरा मैंने जिस टॉपिक पर अपना आर्टिक्ल लिखा है उसकी यूट्यूब विडियो भी एम्बेड की है ताकि आर्टिक्ल पढ़कर किसी को समझ न आए तो विडियो देखकर समझ सकते है।

बाकी वैबसाइट की काफी सारी इंटरनेट पर ऐसी वैबसाइट है जो रैंक तो गूगल पर कर रही है परंतु उनकी स्पीड कम है मैंने अपनी वैबसाइट को सिर्फ 1 सेकंड के अंदर मोबाइल में लोड करने वाली बनाई और लैपटाप पर आपको मेरी साइट क्लिक करने के तुरंत बाद ही दिखाई दे जाएगी।

अब आपने Hubby Digital ब्लॉग को मैंने क्यों बनाया है यह आप जान गए होंगे परंतु मेरे बारे में भी आप थोड़ा थोड़ा जान लीजिये।

पवन सिंह शेखावत कौन है? Pawan Singh Shekhawat Kaun Hai?

पवन सिंह शेखावत एक 21 साल का नवयुवक है, जो दिन रात जब तक इंटरनेट खत्म न हो अपने लैपटॉप के साथ में चिपका हुआ रहता है। चलो थोड़ा विस्तार से बता हूँ। मेरा नाम पवन सिंह शेखावत है और मैं राजस्थान के अंदर श्री गांगनगर जिले में सादुलशहर तहसील के छोटे से गाँव 16 – 17 एसडीएस का रहने वाला हूँ।

मैंने 2020 के अंदर अपनी बीसीए यानि की कंप्यूटर विज्ञान में अपनी स्नातक की डिग्री पूरी कर ली है। अब मैं बैंकिंग में मैनेजर बनने के लिए बैंक पीओ की तैयारी कर रहा हूँ।

Pawan Singh Shekhawat

पवन सिंह शेखावत ने अपनी स्कूल की पढ़ाई कहाँ से की है?

आपके मन में यह जानने की जिज्ञासा भी होगी की पवन सिंह शेखावत ने अपने स्कूल की पढ़ाई किस जगह से की है और किनके साथ में की है तो जानते है? इसके साथ आप मेरी स्कूल टाइम की फोटो देख सकते है जब में 11 साल यां 12 साल का था।

घरवालों ने 5 साल की उम्र में उठाकर गाँव के सरकारी स्कूल में एड्मिशन करा दिया। ये स्कूल मेरे सबसे पसंदीदा जगह में से एक है, मैंने इस स्कूल से अपनी तीसरी क्लास की पढ़ाई पूरी की थी। आपको एक बात और बताता हूँ की मैं अपने सरकारी स्कूल में तीसरी तक पढ़ा था और तीनों क्लास में टॉपर रहा था।

मेरे सरकारी स्कूल में टॉपर रहने की खुशी आज के समय में गूगल पर अपने ब्लॉग को रैंक कर्ववाने से कम नहीं रही होगी। गाँव 16-17 एसडीएस के सरकारी स्कूल के अंदर मुझे उस समय सरदार जगतर सिंह जी और ओम प्रकाश झोरड़ जी पढ़ाते थे। और तीसरी क्लास करने के बाद मैंने इस स्कूल को छोड़ दिया यां यूं कहें की घरवालो ने प्राइवेट स्कूल में पढाने की ठान ली थी और इसलिए मुझे हटा लिया।

इसके बाद मैंने एड्मिशन लिया लालगढ़ के मशहूर स्कूल ज्ञान ज्योति एडुकेशन एंड सीनियर सेकेंडरी स्कूल में। आपको लग रहा होगा की मैंने कहा है तो यह कोई मशहूर स्कूल होगा परंतु ऐसा नहीं है यह स्कूल रास्ते में बंद होने वाली अपनी टूटी फूटी बसों के कारण मशहूर था।

इस स्कूल में हमें अच्छी बस का बहान देकर लगाया गया और बच्चों के एडमिशन लेने के एक महीने बाद बस की जगह एक टेंपु लगा दिया तो आप सोच लो हमारे साथ कितना बड़ा धोखा हुआ था उस समय में, इस स्कूल में मैं अपने दोस्त गुरमेल सिंह जालंधरा के साथ मिलकर बालहंस और छोटु मोटु पढ़ता था।

इस स्कूल में मैंने अपने 4th से लेकर 6th तक की पढ़ाई थी। और यहाँ ज्यादा पढ़ने में मेरा मन नहीं लगता था पर फिर भी 6th क्लास में मैं क्लास में 54 बच्चों में तीसरे नंबर पर आया था।

इसके बाद वापस में 7th कक्षा में अपने गाँव के सरकारी स्कूल में आ गया और इस स्कूल में मेरा प्राइवेट स्कूल से कहीं ज्यादा पढ़ने में मन लगता था बाकी इसमें जो टीचर थे उनका पढ़ाने का तरीका मुझे काफी पसंद था। मैंने अपनी 7 वीं और 8 वीं की पढ़ाई इसी स्कूल से पूरी की थी।

एक बात और मैंने जब 8 वीं क्लास में अपने स्कूल में टॉप किया था तो इसके लिए मुझे राजस्थान सरकार की तरफ से एक लैपटॉप मिला था जो काफी लेट 10 वीं में मेरे बर्थड़े वाले दिन ही मिला था।

इसके बाद मैं 9 वीं में सादुलशहर के एक प्राइवेट स्कूल जिसका नाम एस बी एस सीनियर सेकेंडरी स्कूल है उसमें लग गया था। उस टाइम मुझे बस में बैठकर स्कूल काना पसंद था जो मुझे काफी अच्छा लगता था। इस स्कूल से मैंने अपनी 9 वीं और 10 वीं की पढ़ाई पूरी की थी यहाँ पर मेरे 10 वीं क्लास में 78 प्रतिशत मार्क आए थे वह ही राजस्थान बोर्ड के अंदर जिसके चर्चे सभी जगह मिलते है।

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